
सीज़न 1
3 एपिसोड
1. मैं फेंके हुए पैसे नहीं उठता

1. मैं फेंके हुए पैसे नहीं उठता
यह है सलीम-जावेद की कहानी, हिंदी सिनेमा के मशहूर लेखक, जिन्होंने 24 फिल्मों को साथ में लिखा, जिनमें से 20 सुपरहिट थीं, जैसे ज़ंजीर, दीवार, शोले और डॉन। सलीम खान और जावेद अख्तर दो परदेसी, जो केवल अपने सपनों के साथ मुंबई आए और अपनी मेहनत से सुपरस्टार बन गए। यह कहानी है संघर्ष, आत्मविश्वास और किसी भी हालात में हार ना मानने की।
2. मेरे पास माँ है

2. मेरे पास माँ है
कहानी विजय के किरदार की (जिसे अमिताभ बच्चन ने अमर कर दिया) जिसने पर्दे पर धूम मचा दी और पूरे देश के दिलों को छू लिया। जानिए कैसे उनकी खुद की कहानियों और अनुभवों ने उनके लेखन को प्रभावित किया - जिससे यादगार किरदार और शानदार डायलॉग्स बने, और कैसे उनकी तीव्र सफलता ने उनकी साझेदारी का परीक्षण किया।
3. कितने आदमी थे?

3. कितने आदमी थे?
कई सफलताओं के बाद पहली असफलता की कहानी और उसका सलीम-जावेद की जोड़ी पर असर। क्या हुआ जब उनकी साझेदारी में दरार आई और उनकी निजी जिंदगी में भी उथल-पुथल हुई। अलग होने के बाद की ज़िन्दगी और परिवारों की एक झलक साथ ही नज़र इस पर भी कि आज के हिंदी फिल्म लेखकों की क्या स्थिति है और क्या अब यह लिखने का सफर कुछ आसान हुआ है?
एंग्री यंग मेन
IMDb 7.7/1020241 सीज़नUHD
निर्माता और कलाकार
- निर्देशक
- कलाकार
- स्टूडियो
कंटेंट एडवाइज़री
ऑडियो की भाषाएं
5.1
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