यह कहानी और पटकथा रवींद्रनाथ टैगोर द्वारा रची कविता "हठत देखा" के सार के साथ बनाई गई है। विलग और अछूते प्रेमी है, जो उम्र और समय के साथ वो बूढ़े हो गए वे एक दूसरे से रेलवे के डिब्बे में मिले।
यह कहानी और पटकथा रवींद्रनाथ टैगोर द्वारा रची कविता "हठत देखा" के सार के साथ बनाई गई है। विलग और अछूते प्रेमी है, जो उम्र और समय के साथ वो बूढ़े हो गए वे एक दूसरे से रेलवे के डिब्बे में मिले।