109 साल का बूढ़ा बंजारा बदले के लिए आमादा है और अपने शिकारों को अपने अंग काटकर खाने को मजबूर करता है। समय गुजरने के साथ-साथ दहशत इतनी बढ़ती जाती है कि मौत कहीं अधिक सुखद लगती है।
109 साल का बूढ़ा बंजारा बदले के लिए आमादा है और अपने शिकारों को अपने अंग काटकर खाने को मजबूर करता है। समय गुजरने के साथ-साथ दहशत इतनी बढ़ती जाती है कि मौत कहीं अधिक सुखद लगती है।