1970 में सोने की तस्करी पंजाब में अपने चरम पर थी।गामा का पिता अंतराष्ट्रीय तश्करी का हिस्सा था। उसकी माँ चाहती है वह इज़्ज़तदार बने इसलिए वह भ्रष्टाचार से दूर रहता है। पर उसके पिता के दुश्मन उसे मजबूर करते हैं जुर्म की दुनिया में क़दम रखने के लिए। वह धंधे की उचाईयों तक पहुँचता है और जब उसे महसूस होता है कि वह बस राष्ट्रविरोधी एजेंसियों के हाथों की कठपुतली है, वह अपनी ग़लती सुधारने की कोशिश करता है।
1970 में सोने की तस्करी पंजाब में अपने चरम पर थी।गामा का पिता अंतराष्ट्रीय तश्करी का हिस्सा था। उसकी माँ चाहती है वह इज़्ज़तदार बने इसलिए वह भ्रष्टाचार से दूर रहता है। पर उसके पिता के दुश्मन उसे मजबूर करते हैं जुर्म की दुनिया में क़दम रखने के लिए। वह धंधे की उचाईयों तक पहुँचता है और जब उसे महसूस होता है कि वह बस राष्ट्रविरोधी एजेंसियों के हाथों की कठपुतली है, वह अपनी ग़लती सुधारने की कोशिश करता है।