अर्जुन को बात करना पसंद नहीं, वह बात करने के लिए ही जीता है और ‘अमेरिकन ड्रीम’ जी रहा है; जब तक उसे पता चलता कि उसके पास जीने के लिए सिर्फ 100 दिन बचे हैं! अब उसे बस दो चीज़ें चाहिए – अपनी 7 साल की बेटी के साथ समय बिताना और किसी तरह ज़िंदा रहना। उसकी यही अनोखी कोशिशों की कहानी है ‘आई वांट टू टॉक’, एक सच्ची ‘बेटी-पिता’ की कहानी।