यह फिल्म साल 2010-2013 तक के उत्तर प्रदेश के एक छोटे शहर के बारे में है जहां सिंगल स्क्रीन सिनेमाघर अब भी प्रचलन में हैं और लोगों को इनसे प्यार है। यह प्रेम कहानी है एक उभरते फिल्म निर्देशक बनने की चाह रखने वाले अनु की और एक जवान लड़की मैथली की जो पंडितों के परिवार से है। समाज की बंदिशों की वजह से वे एक दूसरे से आसानी से बात नहीं कर पाते, इसलिए फिल्में एक ज़रिया बन जाती हैं उन्हें मिलाने का।
यह फिल्म साल 2010-2013 तक के उत्तर प्रदेश के एक छोटे शहर के बारे में है जहां सिंगल स्क्रीन सिनेमाघर अब भी प्रचलन में हैं और लोगों को इनसे प्यार है। यह प्रेम कहानी है एक उभरते फिल्म निर्देशक बनने की चाह रखने वाले अनु की और एक जवान लड़की मैथली की जो पंडितों के परिवार से है। समाज की बंदिशों की वजह से वे एक दूसरे से आसानी से बात नहीं कर पाते, इसलिए फिल्में एक ज़रिया बन जाती हैं उन्हें मिलाने का।